राजा शंकरशाह कुँवर रघुनाथशाह का पौशी गाँव मे मनाया गया बलिदान दिवस
वन विभाग का शाहनगर मे हजारो आदिवासी दलितो ने किया घेराव
पन्ना जिले में हजारों वन अधिकार कानून के दावा आवेदन खारिज करना तत्कालीन कलेक्टर दोषी : केपी सिह बुन्देला
*रमेश अग्रवाल, पन्ना*
शाहनगर तहसील के अन्तर्गत 18 सितम्बर को ग्राम पंचायत पौशी मे राजा शंकर शाह,कुवर रघुनाथशाह बलिदान दिवस मनाया गया। दीप जला कर नमन किया।आदिवासी दलित कांति सेना के बेनर तले शहीद पिता एव पुत्र की जीवनी पर संगठन के संयोजक केपी सिंह बुंदेला ने कहा कि देश के लिए मर मिटने का जज्बा होना चाहिए वही सच्चा देशभक्त है। बुन्देला ने वन अधिकार को लेकर शासन एवं जिला प्रशासन पर संगठित जनता के बीच अनेक सवाल खडे किए। बुन्देला द्वारा कहा गया कि वर्ष- 2011 से लेकर अभी तक मध्यप्रदेश में 3 लाख से अधिक दावा आवेदन खारिज किए गए। अकेले पन्ना जिले मे सबसे अधिक वन अधिकार दावा छोटी- छोटी कमियों को लेकर वन अधिनियम कानून को ताक मे रखकर दावा आवेदन खारिज किए गए है जो दुख की बात है।
बुन्देला द्वारा कहा गया कि संगठन की शिकायत पर आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं भोपाल से उपायुक्त ए0आर0हुरमाडेजी26/12/2011से 29/12/2011तक चिन्हित गाँव चार दिवसीय भमण किया गया तथा 85 पृष्ठ की जाँच रिपोर्ट मे तत्कालीन कलेक्टर जिला स्तरीय वन समिति को दोषी पाया। बुन्देला द्वारा कहा गया यह हाल है पन्ना जिला का सभी को सडकों मे उतर कर अदोलन करना होगा। संगठन के जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह ठाकुर, कार्यवाहक अध्यक्ष बडडू आदिवासी,अशोक गोस्वामी,युवा नेता शिवम रजक सहित मंच संचालन सुरेश बागरी ने किया। मंच कार्यक्रम समापन के उपरांत संगठन ने शाला मे फलदार वृक्षारोपण किया। तदुउपरांत पूर्व घोषित योजना मुताबिक पौशी से शाहनगर सैकड़ो वाहनों से तिरंगा यात्रा निकाल कर शाहनगर मे वन बिभाग का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया। संगठन सयोजक केपी सिंह बुंदेला ने रेंजर से सवाल किए जबाब मे यह आश्वासन मिला कि तीन दिवस मे जाँच करा कर जाँच रिपोर्ट भेजी जाएगी।संगठन ने तहसीलदार के माध्यम से कलेक्टर पन्ना,एस पी पन्ना,
डीएफओ दक्षिण वन मंडल पन्ना, के नाम पत्र सौंप कर आंदोलन समापन की घोषणा की। सैकडों आदिवासियों ने जमकर नारेबाजी की। संगठन ने शासन,प्रशासन को कुम्भकर्णी नींद से जगाने का काम किया।
आदिवासी दलितो को संगठित करने मे बिशेष योगदान संपत,लोकेंद्र,बलदेव,अरुण,
हरिचरण आदिवासी का रहा है।